Wednesday, 19 June 2013

जन लोकपाल कानून के बारे में सरकार ने कैसे की धोखाधडी ?

1. जनलोकपाल कानून बनवाने के लिए टीम अण्णा कब से मॉंग कर रही थी। एक अच्छा मसौदा बना कर सरकार को सौंपा भी था। लेकिन उसके बदले अपने बनाये हुए बेहद कमज़ोर मसौदे के लिए सरकार अडी हुई थी।
2. ता. 5 अप्रैल 2011 को जन्तर मन्तर पर हुए पहले अनशन में टीम अण्णा ने मॉंग की थी कि हमारे बनाये मसौदे पर सरकार विचार करें। इस पर दो राय नहीं है कि कानून बनते तो संसद में हैं। लेकिन लोगों ने लोगों के लिए लोक सहभागिता से चलाये हुए लोकतन्त्र में ज़रूरी है कि कानून बनाते समय जन सहभाग से उसका मसौदा बनाया जाना चाहिये।
जनलोकपाल कानून का मसौदा बनाने में जन सहभाग लेने की मॉंग को सरकार नहीं मान रही थी इस लिए अनशन करना पडा। उस अनशन को अच्छा जन समर्थन मिला था। हज़ारों की संख्या में लोग उसमें शामिल हो गये। फिर सरकार ज्वाइण्ट कमिटी बनाने के लिए राज़ी हो गई। सरकार के पॉंच मन्त्री तथा टीम अण्णा के पॉंच सदस्यों की ज्वाइण्ट कमिटी बनाई गई और ड्राफ्ट बनाने के लिए ज्वाइण्ट कमिटी की मीटिंगें शुरु हो गईं। इन मीटिंगों का वीडियो चित्रीकरण करने का हमारा सुझाव सरकार ने टाल दिया क्यों कि जनलोकपाल कानून बनवाने के बारे में सरकार की नीयत सा़फ नहीं थी।
ज्वाइण्ट कमिटी की मीटिंगें होती रहीं, चर्चाएं होती रहीं। सात मीटिंगें हुईं। कई महत्त्व पूर्ण मुद्दों के बारे में, जैसे कि न्यायपालिका (जुडीशियरी), सी. बी. आई., राज्यों में लोकायुक्त के तहत्, , , वर्ग के अ़फसरों को लोकपाल के दायरे में लाना, इन मुद्दों पर चर्चा करना सरकारी प्रतिनिधियों को कठिन होता जा रहा था। इस लिए ज्वाइण्ट कमिटी के सरकारी सदस्य श्री प्रणव मुकर्जी, श्री पी. चिदम्बरम्‌, श्री सलमान खुर्शीद ने चर्चा करने में असमर्थता ज़ाहिर की। अचानक पल्टी खाई और कहा कि अब इस विषय में चर्चा कैबिनेट ही में करेंगे। इस प्रकार हमसे धोखाधडी की गई।
टीम अण्णा ने सवाल उठाया कि अगर चर्चा कैबिनेट में ही करनी थी तो ज्वाइण्ट कमिटी किस लिए बनाई? मन्त्रियों का और हमारा समय क्यों नाहक बरबाद किया। और जो भी हमारी आधी अधूरी चर्चाएं हुई थीं उन्हें कैबिनेट के समक्ष रखने के बजाय सरकार का बनाया हुआ कमज़ोर, निकम्मा मसौदा ही कैबिनेट के सामने विचार करने हेतु रख दिया। देश को चलाने की ज़िम्मेदारी जिनको सौंपी गई है वे ही ज़िम्मेदार लोग किस कदर धोखाधडी करते हैं इसकी यह मिसाल है।

मसौदा कमिटी में सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ (सीनियर) मन्त्री गण कैबिनेट में भी वरिष्ठ थे। टीम अण्णा के बनाये मसौदे पर कमिटी मीटिंगों के दौरान हुई चर्चाएं सबको मालूम थीं। इसके बावजूद कैबिनेट के समक्ष सरकारी मसौदा रखा गया। यह तो सरासर धोखाधडी थी। कैबिनेट के बाद स्टैण्डिंग कमिटी में जो ड्राफ्ट रखा गया वह भी टीम अण्णा का नहीं था, सरकार का ड्राफ्ट ही रखा गया। इन सभी धोखाधडियों के कारण मैंने रामलीला मैदान पर अनशन का निर्णय लिया। सरकार ने रामलीला मैदान में अनशन को अनुमति देने से इन्कार किया। अनशन के लिए दिल्ली में कोई अन्य स्थान देने की विनंति को सरकार ने ठण्डे बस्ते में रख दिया। 16 अगस्त 2011 को अनशन आरम्भ होना था, 15 अगस्त तक कोई स्थान नहीं दिया गया। 16 अगस्त को सवेरे 6 बजे जहॉं मैं रुका था वहॉं पुलिस ने कर बिना कोई भी कारण दिये मुझे हिरासत में लिया, और कोर्ट में खडा कर दिया। ज़मानत देना मैंने अस्वीकार किया। कोर्ट ने मुझे 7 दिन कारावास की सज़ा दी। मुझे तिहाड जेल ले जाया गया। वहॉं पर कमरा दिया गया, कपडे भी दिये। फिर शाम के 6 बजे पुलिस अफसरों ने कर सूचना दी कि आपकी सज़ा मा़फ हो गई है। जेल के बाहर निकलने से मैंने इन्कार कर दिया। पुलिस अधिकारी मुझे जेल के डी. आई. जी. के पास ले गये। उनसे मैंने कहा कि जेल भिजवाना और दो घण्टों में छोडना यह मेरे साथ धोखाधडी है। मैं जेल के बाहर नहीं जाऊंगा। अपनी सज़ा की अवधि पूरी होने तक जेल ही में रहूंगा। अपने कार्यालय से वापिस जेल में भिजवाने में डी. आई. जी. साहब ने असमर्थता जताई। मैंने भी बाहर निकलना मना कर दिया, वहीं पर तीन दिन रुका रहा। फिर तीन दिन बाद सरकार ने रामलीला मैदान की अनुमति दी और मैंने वहॉं जा कर अनशन आरम्भ किया। सरकार बार बार धोखाधडी करती रही है। अनशन के 12 दिन बाद प्रधान मन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह जी ने सन्देश भेजा कि आपके स्वास्थ्य की चिन्ता हो रही है, आप अनशन छोड दें। मैंने बताया कि हर राज्य में लोकायुक्त बिल लाना, जनता की सनद तथा , , , वर्ग के सरकारी अधिकारियों को लोकपाल के दायरे में लाना इन तीन मुद्दों पर संसद की मान्यता लें, बाक़ी मुद्दों पर बाद में बात चलती रहेगी। उसी रात संसद बैठ गई और उक्त तीन मुद्दों पर सर्व सम्मति से संसद में रेज़ोल्यूशन पास हो गया। मन्त्रीमण्डल के अपने सहयोगी मन्त्री श्री विलासराव देशमुख के हाथों प्रधान मन्त्री जी का पत्र आया कि आपके बताए तीन मुद्दों पर संसद में रेज़ोल्यूशन पास हो गया है। अब जल्द से जल्द जनलोकपाल बिल लायेंगे। आप अनशन छोड दें। इस बात पर मैंने यह जान कर विश्वास किया कि इसमें देश की 120 करोड जनता की भलाई है। और मैंने अपना अनशन समाप्त किया।
संसद में रेज़ोल्यूशन पारित होने के और प्रधान मन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह जी के लिखित पत्र के बावजूद फिर से धोखाधडी हो गई है। इस बात को अब दो साल होने में हैं। अब तक इन तीन मुद्दों पर अमल हुआ, और ही जनलोकपाल के बारे में कुछ पहल हुई। इस जालसाज़ी के निषेध में मैंने निर्णय किया है कि अक्टूबर में फिर से रामलीला मैदान में मैं अनशन करूंगा।
अब समय आया है जनता को फिर से सडक पर उतर आने का। समय आने पर जेल भी जाना पडेगा। अब कोई और रास्ता नहीं दिखाई देता। भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए, महँगाई कम करने के लिए बारम्बार धोखा देने वाली सरकार के खिलाफ कुछ कर गुज़रने का समय आया है।
अक्टूबर माह में होने जा रहे मेरे इस अनशन में जो मेरा साथ देना चाहते हैं वे कृपया निम्न लिखित पते पर सम्पर्क करें। अपना पता, मोबाईल नम्बर, ईमेल आदि सभी जानकारी देने का कष्ट करें। ईमेल अथवा मोबाईल द्वारा सम्पर्क में रहें।

सम्पर्क का पता :
मु. पो. राळेगणसिद्धी, तहसील पारनेर, ज़िला अहमदनगर (महाराष्ट्र) 414302.
फोन : (02488) 240401, 240010
bvjralegan@gmail.com, annahazareoffice@gmail.com
अपनी जानकारी एसएमएस करें... 99 235 99 234
धन्यवाद.
राळेगणसिद्धी, 20 जून 2013.

1 comment:

  1. Anna and Dream of Exemplary Democracy

    Notwithstanding the all past scandals and scams which not only paralyzed the functioning of the parliamentary bodies but also tarnished the image of India on global stage, intellectuals again started the fresh debate on various issues in context of fast of the anti corruption crusader Anna Hazare for the most contentious Lokpal Bill. This debates and discussion are endless but reality and dire fact is that democracy is definitely murdered by its protectors.
    As a world’s largest democracy, India sets exemplary for the rest of the democracies in the world. Henceforth it is onus of the pillars of this democracy to give apt message. But recent series of the events has definitely raised very crucial and vital issues. Firstly, what is the Role of the civil societies in the formation of the law? Parliament is the highest constitutional authority of this nation which is absolute in the formation of the law and order. Since standing committee invites the comments from the public over various Bills put forth in parliament, therefore individuals, and civil societies has place to raise the valid comments. Then what was the wrong with the notified joint drafting committee which was the confluence of the executives and representatives of the civil society to draft the effective Lokpal Bill?

    Second, are fundamental rights of the citizens are effectively protected by the Government? Freedom of speech and expression as well as freedom to assemble are the fundamental rights under article 19(1) (a) and (b) of the constitution of India respectively with certain conditions. But the way by which government squelched the Baba and Anna’s anti corruption movement, raises some basic questions about the safeguards of the fundamental rights. There is need of the judicial activism of the Supreme Court to prevent the further rape of the article 32 i.e. constitutional remedies.

    Third, what are the rights and responsibilities of the Union Government? To heal the wounds over the issue of detention of the veteran Gandhian and his supporters, the Union Government nudged matter in the court of Delhi Police. Already team Anna requested Prime Minister to intervene in this matter but reply from the PMO has once again shown helplessness to resolve the issue of the national importance. But it is not only about shrewdly transferring the authorities to escape from the blame game. It further sends confusion over the provisions of the Schedule VII of the constitution which clearly distributes the powers and authorities.

    Ultimately it is very clear that Anna’s Anti corruption is beyond the Lokpal Bill. It is about the ideal democratic nation which was the dream of our forefathers. This movement will not give victory or defeat to anyone but we hope that its outcome will contribute in the strengthening the concept of socialistic, secular, democratic republic of India.
    (was published @ http://yogeshthorat.blogspot.in/2011/08/anna-and-dream-of-exemplary-democracy.html#comment-form)

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