Monday, 4 December 2017

लोकपाल, लोकायुक्त चयन के बारें में प्रधानमंत्री मोदीजी को चिट्ठी....

30 November 2017

प्रति,
मा. नरेंद्र मोदीजी,
प्रधानमंत्री, भारत सरकार,
राईसीना हिल, नई दिल्ली

विषय- लोकपाल, लोकायुक्त कानून पर अमल करने में आपकी सरकार की उदासिनता के कारण 23 मार्च 2018,
           शहिद दिवस के अवसर पर दिल्ली में आंदोलन करने हेतु...

महोदय,
1966 में प्रशासनिक सुधार आयोग की स्थापना हुई थी। इस आयोग ने केंद्र में लोकपाल और राज्योंमें लोकायुक्त नियुक्ती की शिफारीश की थी। लोकपाल का मुख्य उद्देश यह था की, देश की जनता को जलद गती से और लाभकारी न्याय मिले, प्रशासनिक भ्रष्टाचार को प्रतिबंध लगे, प्रशासनिक अवैधता और अनियमितता को प्रतिबंध लगे, प्रशासन में जो मनमानी निर्णय लिए जाते है उनको प्रतिबंध लगे, स्वच्छ, पारदर्शी, प्रशासन व्यवस्था निर्माण हो। प्रशासन जनता को जवाबदेही हो और लोकतांत्रिक प्रशासन व्यवस्था निर्माण हो।
लोकपाल, लोकायुक्त भले ही जनता और देश के भलाई के लिए प्रशासनिक सुधार आयोग ने शिफारीश हों, लेकिन आपकी सरकार को अपनी भलाई, अपने पक्ष-पार्टी की भलाई के कारण जनता और देश की भलाई की सोच दिखाई नहीं देती है। शायद इसी कारण लोकपाल, लोकायुक्त कानून पर अमल करने के बारे में आपके पास पहले से इच्छाशक्ती का अभाव दिखाई दे रहा है। मैने आपको दस बार लोकपाल और लोकायुक्त का अमल हो इसलिए पत्र भेजा। लेकिन, आपने जवाब तक नहीं दिया। यह लोकपाल और लोकायुक्त के बारे में आपकी उदासिनता का प्रत्यक्ष उदाहरण है। जब आप गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब गुजरात की जनता गुजरात में लोकायुक्त नियुक्ती करने की मांग कर रही थी। लेकिन आपकी सरकारने लोकायुक्त नियुक्ती नहीं किया। वास्तविक भ्रष्टाचार को रोकथाम लगाने के लिए लोकायुक्त की नियुक्ती जरूरी थी। लेकिन आपकी सरकारने लोकायुक्त की नियुक्ती नहीं की। फिर गुजरात के तत्कालिक राज्यपाल महोदयने लोकायुक्त की नियुक्ती की थी। उसके बाद आपकी गुजरात सरकार लोकायुक्त नियुक्ती के विरोध में उच्च न्यायालय में गई थी। उच्च न्यायालयने गुजरात सरकार के विरोध में निर्णय दिया था। फिर लोकायुक्त नियुक्ती के विरोध में गुजरात सरकार सर्वोच्च न्यायालय में गई थी।। सर्वोच्च न्यायालयने भी सरकार के खिलाफ निर्णय दिया था। तब से पिछले 9 साल में अभी तक गुजरात मे लोकायुक्त नहीं नियुक्त किया गया। अब केंद्र में आपकी सरकार स्थापित हो कर तीन साल से जादा वक्त बित चुका हैं। फिर भी लोकपाल कानून पर अमल नहीं हो रहा हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि, केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त नियुक्त करने की आपकी सरकार की मंशा नहीं है।
            केंद्र में 2014 में आपकी पार्टी की सरकार सत्ता में आयी। तब लगा था कि लोकपाल, लोकायुक्त कानून पर अमल होगा। क्योंकी सत्ता में आने से पहले चुनाव में आपने देशवासियोंको आश्वासन दिया था की, हमारी सरकार सत्ता में आती है तो हम लोकपाल, लोकायुक्त कानून पर अमल करेंगे। लेकिन आपकी सरकार सत्ता में आने के बाद आप कहने लगे लोकसभा में विपक्ष नेता ना होने के कारण हम लोकपाल कि नियुक्ती नहीं कर सकते। यह बहाना बताकर लोकपाल नियुक्ती टाल दी। सर्वोच्च न्यायालय ने आपकी सरकार को लोकपाल नियुक्ती के लिए दो बार फटकार लगाई। लेकिन आपकी सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय की भी नहीं मानी। वास्तव यह है कि, लोकपाल, लोकायुक्त कानून की धारा 4 की उपधारा 2 में लिखा है कि, चयन समिती में एखाद पद रिक्त होने पर अध्यक्ष या उनके सदस्य की पद नियुक्ती अवैध नहीं होगी। कानून में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद भी आपने नहीं माना। इससे स्पष्ट होता है की आपके पास इच्छाशक्ति का अभाव है।
            आपने लोकपाल की नियुक्ती की नहीं। लेकिन लोकपाल लोकायुक्त कानून की धारा 44 में बदलाव करके लोकपाल, लोकायुक्त कानून को कमजोर करनेवाला बिल संसद में रखा। 27 जुलाई 2016 को लोकसभा में बिल रखा और एक ही दिन में ध्वनिमत से पास किया। 28 जुलाई 2016 को राज्यसभा में रखा और उसी दिन आवाजी मतदान से पास किया। 29 जुलाई 2016 को राष्ट्रपतीजी के पास भेजा और राष्ट्रपतीने उसी दिन हस्ताक्षर कर दिए। सभी सांसद, सभी अधिकारी इनको अपनी पत्नी, बच्चों के नाम पर रही सम्पत्ती का ब्योरा हर साल देना अनिवार्य था। लोकपाल, लोकायुक्त कानून को कमजोर कर के इस प्रावधान को संशोधन बिल के कारण हटा दिया गया। और सभी अधिकारीयों को भ्रष्टाचार करने का रास्ता खुला कर दिया गया। एक तरफ आप बोलते है भ्रष्टाचार मुक्त भारत निर्माण करना है और दुसरी तरफ भ्रष्टाचार को रोकथाम करनेवाला लोकपाल, लोकायुक्त कानून कमजोर करते है। तो कैसे होगा भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण? आपकी कथनी और करनी में फर्क पड रहा है।
            लोकपाल, लोकायुक्त कानून 5 साल में नहीं बनता और लोकपाल कानून को कमजोर करनेवाला कानून सिर्फ तीन दिन में पारित किया है। इससे स्पष्ट होता है कि, लोकपाल, लोकायुक्त कानून जो भ्रष्टाचार को रोकथाम लगा सकता है लेकिन आपकी सरकार की मंशा नहीं थी, नियत साफ नहीं है। यह स्पष्ट होता है।
आपकी सरकार लोकपाल के लिए विरोधी पक्षनेता नहीं यह बहाना बनाते है। लेकिन लोकायुक्त के लिए विपक्ष नेता की जरूरत नहीं थी। हर राज्योंमें लोकायुक्त नियुक्ती न करने का क्या कारण है? समझ मे नही आता। आप बोलते है लोकायुक्त नियुक्ती राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। हम पुछते है जिन जिन राज्योंमें आपकी पार्टी की सत्ता है, उन राज्योंमें लोकायुक्त नियुक्त करने में क्या कठिनाईयाँ है? इसका जवाब आपकी सरकार से नहीं मिलता। इससे स्पष्ट होता है कि, आपकी लोकपाल, लोकायुक्त के बारे में नियत साफ नहीं है। लोकपाल, लोकायुक्त के लिए आपकी सरकार की कैसी उदासिनता है यह मै दिल्ली के आंदोलन में एक एक बात जनता के सामने लाते रहूँगा। मै किसी पक्ष-पार्टी के विरोध में आंदोलन नहीं किया। लेकिन देश को कमजोर करनेवाली प्रवृत्तियाँ जहा जहा दिखाई दी, तब आंदोलन किया। क्योंकी देश हमारा है। उसको कमजोर करने से रोकना हमारा कर्तव्य है।
            आप जनता को बताते है, भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाना है। और भ्रष्टाचार को रोकथाम लगानेवाले लोकपाल कानून को कमजोर करते है। आपकी कथनी और करनी में अंतर पड रहा है। इसलिए मैने अनेक राज्योंमें कार्य़कर्ताओं को पत्र भेजकर आंदोलन के बारे में राय ली।  और अधिकांश कार्यकर्ताओंने कहा है 23 मार्च शहीद दिवस है। शहीद दिवस के अवसर पर दिल्ली में आंदोलन करना चाहिए। इसलिए 23 मार्च 2018 को शहीद दिवस के अवसर पर दिल्ली में आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। कृपया हमें आंदोलन के लिए जगह बता दिजीए।
धन्यवाद।
भवदीय,
कि. बा. तथा अन्ना हजारे

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